छात्र समझेंगे कि बच्चे को बीमार होना क्यों अच्छा लगा और उसने क्या योजना बनाई।
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बच्चे की सोच कि बीमार होना मज़ेदार है।
अस्पताल में सुधाकर काका को आराम करते और बिना किसी शोरगुल के साबूदाने की खीर खाते देख, बच्चे के मन में एक अनोखा विचार आया। उसने सोचा कि बीमारों के भी कितने ठाठ होते हैं—न कोई ट्रैफ़िक, न धूल, और न ही स्कूल के होमवर्क (गृहकार्य) की चिंता!
बच्चे का अस्पताल का पहला अनुभव।
बच्चे ने पहली बार अस्पताल देखा। वहाँ का वार्ड बहुत बड़ा और एकदम साफ था। अस्पताल में न ट्रैफ़िक का शोरगुल था, न धूल-मिट्टी, और न ही मच्छर-मक्खी। सब जगह एकदम शांति थी।

बच्चे द्वारा स्कूल न जाने की योजना बनाना।
कुछ दिन बाद, बच्चे का स्कूल जाने का मन बिल्कुल नहीं किया। उसने अपना होमवर्क (गृहकार्य) भी नहीं किया था, इसलिए उसे स्कूल में सजा मिलने का डर था।

बच्चे ने बहाना क्यों बनाया?
कहानी में बच्चे के स्कूल न जाने का मुख्य कारण क्या था?