छात्र मेजर ध्यानचंद की टीम-भावना और देशप्रेम के भाव को समझ सकेंगे।
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बर्लिन ओलंपिक और ध्यानचंद की टीम-भावना।

आज मैं जहाँ भी जाता हूँ बच्चे व बूढ़े मुझे घेर लेते हैं और मुझसे मेरी सफलता का राज जानना चाहते हैं। मेरे पास सफलता का कोई गुरु-मंत्र तो है नहीं। हर किसी से यही कहता कि लगन, साधना और खेल भावना ही सफलता के सबसे बड़े मंत्र हैं।
ध्यानचंद की सफलता का रहस्य और उनकी निस्वार्थ खेल भावना।
"लगन, साधना और खेल भावना ही सफलता के सबसे बड़े मंत्र हैं।"
मेजर ध्यानचंद ने स्पष्ट किया कि उनकी असाधारण सफलता किसी छिपे हुए चमत्कार या शार्टकट का परिणाम नहीं थी। लगन (निरंतर प्रयास) और साधना (कठोर अभ्यास) ही वह आधार हैं जिन पर महानता टिकी होती है।
पाठ के आधार पर वाक्यों को पूरा करें।
मेजर ध्यानचंद का मानना था कि , साधना और खेल भावना ही सफलता के सबसे बड़े मंत्र हैं। सन् में बर्लिन ओलंपिक में उन्हें कप्तान बनाया गया था। वे हमेशा यही सोचते थे कि खेल के मैदान पर हार या जीत केवल मेरी नहीं, बल्कि पूरे की है।
पाठ का मुख्य संदेश।
