छात्र संस्मरण के प्रारंभिक भाग को पढ़कर खेल भावना और सकारात्मक प्रतिक्रिया के महत्व को समझेंगे।
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1933 के हॉकी मैच की घटना और मेजर ध्यानचंद की प्रतिक्रिया।
इस पाठ का नाम पढ़कर आपके मन में कुछ गोल वस्तुओं के नाम या चित्र उभरे होंगे, गोल गेंद, गोल रोटी, गोल चंद्रमा आदि। लेकिन यह पाठ एक विशेष प्रकार के गोल और उसे करने वाले के बारे में है। यह पाठ एक प्रसिद्ध खिलाड़ी के संस्मरण का एक अंश है। आइए, इसे पढ़ते हैं और जानते हैं कि कौन थे वे प्रसिद्ध खिलाड़ी!
खेल भावना और शानदार प्रदर्शन

खेल में सच्ची जीत क्रोध से नहीं, बल्कि उत्कृष्ट खेल भावना और शानदार प्रदर्शन से मिलती है।
गुस्से के बजाय अपने खेल प्रदर्शन से जवाब देने की घटना का विश्लेषण।
"मैंने एक के बाद एक झटपट छह गोल कर दिए।"
इस पंक्ति से पता चलता है कि ध्यानचंद ने शारीरिक चोट का जवाब हिंसा या क्रोध से नहीं दिया। उन्होंने अपनी सर्वश्रेष्ठ खेल प्रतिभा का प्रदर्शन करके विपक्षी टीम को करारा जवाब दिया। यह सच्चे खिलाड़ी की निशानी है।
पाठ के पहले भाग पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न।
सन् 1933 में मेजर ध्यानचंद की 'पंजाब रेजिमेंट' का मुकाबला किस टीम के साथ हो रहा था?