कविता के आखिरी चार छंद पढ़ो, जिनमें कवि बताते हैं कि इसी धरती पर राम, सीता, कृष्ण और बुद्ध हुए। समझो कि कवि भारत को 'युद्ध-भूमि' और 'बुद्ध-भूमि' दोनों क्यों कहते हैं।
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राम, सीता, कृष्ण की गीता और बुद्ध की दया वाली पंक्तियाँ।
वह धर्मभूमि मेरी,
वह कर्मभूमि मेरी।
वह जन्मभूमि मेरी
वह मातृभूमि मेरी।
कविता में जिनका नाम आया है, वे चारों एक चित्र में।

हमारी मातृभूमि ने कई महान चरित्रों को जन्म दिया है, जिन्होंने पूरी दुनिया को मार्ग दिखाया।
धर्मभूमि, कर्मभूमि, राम-कृष्ण और बुद्ध वाली पंक्तियों का आसान अर्थ।
"वह धर्मभूमि मेरी, / वह कर्मभूमि मेरी।"
कवि अपनी मातृभूमि को केवल एक भौगोलिक स्थान नहीं मानता, बल्कि इसे कर्मभूमि और धर्मभूमि कहता है। इसका अर्थ है कि इस धरती पर महान लोगों ने अपने श्रेष्ठ कर्मों से मानवता और धर्म की स्थापना की है। यह वह स्थान है जहाँ कर्म करने को प्रधानता दी गई है।
गीता, बुद्ध की सीख और 'युद्ध-भूमि, बुद्ध-भूमि' के बारे में सही जवाब चुनो।
कविता की पंक्तियों "श्रीकृष्ण ने सुनाई..." के आधार पर, श्रीकृष्ण ने विश्व को क्या सुनाया था?