शिकारी कहता है कि हंस उसका है, पर बचाने वाला उसे देने से मना कर देता है। बात न्यायालय तक पहुँचती है और माँ राहुल से फ़ैसला करने को कहती हैं। पढ़ो कि राहुल ने क्या कहा और क्यों।
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चित्र में एक ओर तीर चलाने वाला शिकारी है, दूसरी ओर हंस को गोद में लिए सिद्धार्थ।

एक के मन में दया है, दूसरे के मन में नहीं। कहानी का झगड़ा इसी पर है।
दोनों अपनी-अपनी बात पर अड़ जाते हैं और झगड़ा शुरू हो जाता है।
जब हंस बाण से घायल होकर गिरता है, तो शिकार करने वाला आखेटक (शिकारी) वहाँ आ पहुँचता है। उसे अपने अचूक निशाने पर बहुत गर्व था और वह अपनी लक्ष्य-सिद्धि का अभिमानी था।

कविता की सबसे ज़रूरी पंक्ति और उसका आसान अर्थ।
माँ कहानी रोककर राहुल से पूछती हैं कि न्याय किसका साथ देगा। पढ़ो राहुल ने क्या जवाब दिया।
जब दोनों अपनी-अपनी ज़िद पर अड़े रहे, तो बात न्यायालय (राजा के दरबार) में पहुँची। इस बिंदु पर माँ यशोधरा कहानी रोककर अपने पुत्र राहुल से पूछती है, "तू निडर होकर बता कि इस विवाद में न्याय किसका पक्ष लेगा?"

कविता की चार पंक्तियों को उन्हें कहने वाले से मिलाओ।
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