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गिरिधर कविराय की कुंडलिया: सोच-समझकर काम करो

गिरिधर कविराय की दो कुंडलियाँ पढ़ो: पहली बताती है कि बिना सोचे काम करने पर बाद में पछताना पड़ता है, दूसरी कहती है कि जो बीत गया उसे भूलकर आगे की सोचो। साथ में जानो कि कुंडलिया कैसे बनती है और यह सीख आज मोबाइल पर कैसे काम आती है।

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concepts · 5

  1. 01

    पहली कुंडलिया: बिना विचारे जो करै

    छात्रों को पहली कुंडलिया का अर्थ और बिना सोचे काम करने के परिणामों को समझाना।

  2. 02

    दूसरी कुंडलिया: बीती ताहि बिसारि दे

    छात्रों को अतीत की गलतियों को भुलाकर भविष्य पर ध्यान केंद्रित करने की सीख देना।

  3. 03

    कुंडलिया की विशेषताएं और व्याकरण

    कुंडलिया छंद की संरचनात्मक विशेषताओं को पहचानना और समय (काल) सूचक शब्दों का प्रयोग सीखना।

  4. 04

    आधुनिक जीवन में 'बिना विचारे' (साइबर सुरक्षा)

    दैनिक जीवन, विशेषकर डिजिटल दुनिया में बिना सोचे-समझे काम करने (जल्दबाजी) के खतरों को समझना।

  5. 05

    समीक्षा और अभ्यास

    संपूर्ण अध्याय के मुख्य विचारों, शब्दावली और व्यावहारिक अनुप्रयोगों को समेकित करना।

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