Chapter 6 of 8
गिरिधर कविराय की कुंडलिया: सोच-समझकर काम करो
गिरिधर कविराय की दो कुंडलियाँ पढ़ो: पहली बताती है कि बिना सोचे काम करने पर बाद में पछताना पड़ता है, दूसरी कहती है कि जो बीत गया उसे भूलकर आगे की सोचो। साथ में जानो कि कुंडलिया कैसे बनती है और यह सीख आज मोबाइल पर कैसे काम आती है।
