छात्र कविता के प्रत्येक पद्यांश का अर्थ समझेंगे और प्रकृति में होने वाले बदलावों को पहचानेंगे।
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कविता के शुरुआती अंश का भावार्थ, जहाँ वर्षा के आने का वर्णन है।
कविता "वर्षा-बहार" में प्रकृति के खूबसूरत नज़ारों का वर्णन किया गया है। आसमान में अनूठी छटा के साथ काले और घनघोर बादल छा गए हैं। बिजली के चमकने और बादलों के गरजने के साथ जब झमाझम बारिश होती है, तो सूखे झरने भी बह निकलते हैं।
जलचरों और पपीहे पक्षी की खुशी का वर्णन।
वर्षा ऋतु केवल इंसानों के लिए ही नहीं, बल्कि जीव-जंतुओं के लिए भी खुशियाँ लाती है। बारिश का पानी तालों (तालाबों) में भर जाने से सभी जलचर (पानी में रहने वाले जीव जैसे मछली, कछुआ आदि) बहुत प्रसन्न हो जाते हैं।
तालाब में जीव-जंतुओं और पपीहे का दृश्य।

वर्षा ऋतु तालाब के जीवों और पक्षियों के लिए एक नई ऊर्जा लेकर आती है।
कविता के पहले भाग से बहुविकल्पीय प्रश्न।
"नभ में छटा अनूठी, घनघोर छा रही है" - इस पंक्ति से कवि का क्या तात्पर्य है?
कविता के अगले अंश का भावार्थ, जहाँ मोर के नाचने और फूलों के खिलने का वर्णन है।
बारिश को देखकर जंगल में मोर खुशी से अपने पंख फैलाकर नृत्य करने लगते हैं। वहीं दूसरी ओर, मेंढक भी अपनी टर्र-टर्र की आवाज़ से सुंदर और प्यारे गीत गाकर सबका मन मोह लेते हैं।
हंसों, किसानों और जगत की शोभा का वर्णन।
सफेद हंस अपनी सुंदर कतारें (पंक्तियाँ) बाँधकर चल रहे हैं जो प्रकृति के अनुशासन को दर्शाता है। अच्छी बारिश से खेतों में भरपूर फसल की उम्मीद लिए किसान भी खुशी से मन को हर लेने वाले गीत गा रहे हैं।
वर्षा ऋतु जीवन का आधार है।