Connect the scientific concepts of water conservation to cultural history (Kudan's ponds) and the inspirational mindset of M. Visvesvaraya.
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कूड़न किसान और पारस पत्थर की कहानी।
कूड़न किसान की बेटी को खेत में एक नुकीला पत्थर मिला, जिससे उसकी लोहे की दरांती सोने में बदल गई। यह एक पारस पत्थर था। जब कूड़न ने यह बात राजा को बताई, तो राजा ने बिना किसी लालच के पारस वापस कर दिया और कहा, "अच्छे-अच्छे काम करते जाना, तालाब बनाते जाना।"
एम. विश्वेश्वरैया के बचपन की प्रेरणा।
छह वर्ष की आयु में मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया ने बारिश के दौरान एक अद्भुत दृश्य देखा। नाली के उफनते पानी और भँवर ने एक बहुत भारी पत्थर को बहा दिया था। यह देखकर नन्हे विश्वेश्वरैया समझ गए कि "प्रकृति ही शक्ति है" और उन्होंने इसके बारे में सब कुछ जानने का फैसला किया।
बालक विश्वेश्वरैया प्रकृति को देखते हुए।

बचपन की एक घटना ने विश्वेश्वरैया को एक महान इंजीनियर बनने की प्रेरणा दी।
इतिहास और प्रेरणा खंड पर आधारित प्रश्न।
प्राचीन काल में समाज तालाब बनाने वालों के प्रति मुख्य रूप से क्या प्रकट करता था?