आगे की ओर कदम
अतीत को छोड़कर भविष्य की ओर देखने का दृश्य।

अतीत के बोझ को पीछे छोड़कर ही हम सुनहरे भविष्य की ओर बढ़ सकते हैं।
छात्रों को अतीत की गलतियों को भुलाकर भविष्य पर ध्यान केंद्रित करने की सीख देना।
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अतीत को छोड़कर भविष्य की ओर देखने का दृश्य।

अतीत के बोझ को पीछे छोड़कर ही हम सुनहरे भविष्य की ओर बढ़ सकते हैं।
दूसरी कुंडलिया की पंक्तियाँ और उनका अर्थ।
बीती ताहि बिसारि दे आगे की सुधि लेइ।
जो बनि आवै सहज में ताही में चित देइ॥
ताही में चित देइ बात जोई बनि आवै।
दुर्जन हँसै न कोइ चित्त में खता न पावै॥
कह गिरिधर कविराय यहै करु मन परतीती।
आगे को सुख होइ समुझि बीती सो बीती॥
दूसरी कुंडलिया से संबंधित प्रश्न।
"बीती ताहि बिसारि दे आगे की सुधि लेइ" पंक्ति द्वारा कौन-सी सलाह दी गई है?
मुख्य विचार का सारांश।
शांतिपूर्ण मन का रहस्य यह है कि हम अपनी पिछली गलतियों को न दोहराएं और जो हो चुका है, उसके बारे में लगातार चिंता न करें। जो बीत गया, उसे भूलकर आगे बढ़ना ही समझदारी और सुख का मूल है।