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क्या आप जानते हैं?
कहावतों के रूप में कुंडलियों का प्रयोग।
गिरिधर कविराय की कविताएँ जन-मानस में इतनी प्रसिद्ध हैं कि लोग आज भी उनका उपयोग कहावतों की तरह करते हैं, जैसे: 'बिना बिचारे जो करै सो पाछे पछिताय'!
छात्रों को पहली कुंडलिया का अर्थ और बिना सोचे काम करने के परिणामों को समझाना।
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कहावतों के रूप में कुंडलियों का प्रयोग।
पहली कुंडलिया की पंक्तियाँ और उनका सरल हिंदी अर्थ।
बिना बिचारे जो करै सो पाछे पछिताय।
काम बिगारे आपनो जग में होत हँसाय॥
जग में होत हँसाय चित्त में चैन न पावै।
खान पान सन्मान राग रंग मनहिं न भावै॥
कह गिरिधर कविराय दुःख कछु टरत न टारे।
खटकत है जिय माहिं कियो जो बिना बिचारे॥
बिना विचारे काम करने का दृश्य चित्रण।

बिना सोचे-समझे काम करने से नुकसान होता है और लोग मजाक भी बनाते हैं।
कुंडलिया की पंक्तियों का उनके अर्थ से मिलान।
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