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मातृभूमि: कवि को अपना देश क्यों प्यारा है?

सोहनलाल द्विवेदी की इस कविता में कवि हिमालय, नदियों, कोयल और आम के बागों से लेकर राम, कृष्ण और बुद्ध तक, अपने देश की प्यारी बातें गिनाते हैं। कविता पढ़ो, नए शब्द सीखो और 'भूमि' से नए शब्द बनाओ।

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  1. 01

    हिमालय, नदियाँ और कोयल: कविता का पहला हिस्सा

    कविता के पहले पाँच छंद पढ़ो, जिनमें ऊँचा हिमालय, गंगा-यमुना, झरने और आम के बाग हैं। कठिन शब्दों के अर्थ सीखो और देखो कि कवि ने इन्हें कैसे बताया है।

  2. 02

    राम, सीता, कृष्ण और बुद्ध: कविता का दूसरा हिस्सा

    कविता के आखिरी चार छंद पढ़ो, जिनमें कवि बताते हैं कि इसी धरती पर राम, सीता, कृष्ण और बुद्ध हुए। समझो कि कवि भारत को 'युद्ध-भूमि' और 'बुद्ध-भूमि' दोनों क्यों कहते हैं।

  3. 03

    कविता के शब्दों से नए शब्द बनाओ

    जानो कि कवि ने 'यमुना' को 'यमुन' क्यों लिखा, 'पग-पग' जैसे दोहराए शब्दों का अर्थ समझो, 'भूमि' से नए शब्द बनाओ और देखो कि एक मात्रा से 'दया' कैसे 'दिया' बन जाता है।

  4. 04

    देश पर दो और रचनाएँ: वन्दे मातरम् और पुष्प की अभिलाषा

    बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय का 'वन्दे मातरम्' उसके अर्थ के साथ पढ़ो, और माखनलाल चतुर्वेदी की कविता 'पुष्प की अभिलाषा' भी। फिर सोचो कि इनमें और 'मातृभूमि' में क्या एक जैसा है और क्या अलग।

  5. 05

    पूरे पाठ का अभ्यास: शब्द, सवाल और तुम्हारी बात

    कविता के कठिन शब्द फिर से दोहराओ, कविता का मुख्य विषय पहचानो और खास पंक्तियों का अर्थ अपने शब्दों में लिखो। आखिर में अपनी उस जगह के बारे में बताओ जो तुम्हें सबसे अच्छी लगती है।

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