झरोखे से: डाँडी या गोथा (स्वदेशी खेल)
खेल के मैदान का लेआउट और उपकरणों को समझना आवश्यक है।

बाँस की बनी साधारण गेंद और 'L' आकार की डंडियों के साथ खेला जाने वाला यह स्वदेशी खेल हॉकी के समान है।
छात्र भारत के स्वदेशी खेल 'डाँडी या गोथा' के नियमों और हॉकी से उसकी समानताओं को समझ सकेंगे।
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खेल के मैदान का लेआउट और उपकरणों को समझना आवश्यक है।

बाँस की बनी साधारण गेंद और 'L' आकार की डंडियों के साथ खेला जाने वाला यह स्वदेशी खेल हॉकी के समान है।
भील-भिलाला बच्चों के खेल 'डाँडी या गोथा' का संपूर्ण परिचय।
यह भील-भिलाला बच्चों का खेल है। ‘डाँडी’ और ‘गोथा’ शब्द का अर्थ एक ही है— खेलने की हाथ-लकड़ी। देखा जाए तो यह खेल काफी-कुछ हमारे खेल हॉकी जैसा है। अंतर बस इतना है कि हॉकी में गोल करने के लिए गोलपोस्ट होते हैं, जबकि इस खेल में ऐसा कोई निर्धारण नहीं है। दूसरा अंतर यह है कि भील-भिलाला बच्चों की यह गेंद, हॉकी की अपेक्षा एकदम साधारण होती है। यह बाँस की बनी होती है।
आधुनिक खेल हॉकी और स्वदेशी खेल गोथा के बीच तुलना।
"हॉकी में गोल करने के लिए गोलपोस्ट होते हैं, जबकि इस खेल में ऐसा कोई निर्धारण नहीं है।"
यह पंक्ति स्पष्ट करती है कि यह खेल आधुनिक हॉकी से कैसे अलग है। हॉकी में लक्ष्य एक निश्चित नेट (गोलपोस्ट) में गेंद डालना होता है, लेकिन स्वदेशी खेलों में मैदान की सीमा और भौगोलिक स्थितियाँ ही खेल का लक्ष्य तय करती हैं।
डाँडी या गोथा खेल के नियमों पर आधारित प्रश्न।
पाठ के अनुसार, 'डाँडी या गोथा' खेल में प्रयुक्त होने वाली गेंद (दुईत) किस सामग्री की बनी होती है?