बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय का 'वन्दे मातरम्' उसके अर्थ के साथ पढ़ो, और माखनलाल चतुर्वेदी की कविता 'पुष्प की अभिलाषा' भी। फिर सोचो कि इनमें और 'मातृभूमि' में क्या एक जैसा है और क्या अलग।
Preview · progress not saved — Chapter 1 is free
यह गीत बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय ने लिखा था, और आज़ादी की लड़ाई में इसने लोगों में जोश भरा।
हम सभी अपने विद्यालय में 'वंदे मातरम्' गाते हैं। इसकी रचना बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय द्वारा की गई थी। हमारे देश में इस गीत को राष्ट्रगान 'जन गण मन' के समान ही आदर और सम्मान प्राप्त है।
'पुष्प की अभिलाषा' कविता का चित्र।

फूल चाहता है कि उसे उस रास्ते पर फेंका जाए, जिस पर देश के लिए वीर जाते हैं।
माखनलाल चतुर्वेदी की कविता पढ़ो, जिसमें एक फूल बताता है कि वह कहाँ चढ़ना चाहता है।
चाह नहीं, मैं सुरबाला के गहनों में गूँथा जाऊँ,
चाह नहीं, प्रेमी-माला में बिंध प्यारी को ललचाऊँ,
चाह नहीं, सम्राटों के शव पर हे हरि डाला जाऊँ,
चाह नहीं, देवों के सिर पर चढ़ूँ भाग्य पर इठलाऊँ,
दोनों रचनाओं को साथ रखकर सोचो कि इनमें कौन-सी बातें मिलती हैं और कौन-सी अलग हैं।
आपने इस अध्याय में 'मातृभूमि' कविता और 'वंदे मातरम्' दोनों को पढ़ा है। आइए अब इन दोनों सुंदर रचनाओं के बारे में सोच-विचार करें और अपनी साझी समझ विकसित करें।